कांग्रेस नेताओं ने न्यायालय में फर्जी दस्तावेज़ जमा किये: निर्वाचन आयोग

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा सर्वोच्च न्यायालय  में आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दायर याचिका  में चुनाव आयोग द्वारा अपना पक्ष रखा गया जिसे सुनने के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के दावों पर गहरी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि उस कंपनी को बुलाया जा सकता है जिसने कथित रूप से मतदाताओं के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं और दोहराव को रेखांकित किया है।

अपना पक्ष रखते हुए निर्वाचन आयोग ने यह कहा कि यह याचिका चुनाव आयोग को बदनाम करने की एक सजिश है तथा दायर याचिका में फर्जी दस्तावेज दायर कर अनुकूल फैसला पाने और चुनाव निकाय की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता के तरफ से उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि दस्तावेजों को जमा करने में कुछ भी गलत नहीं है और डुप्लिकेट मतदाताओं का आंकड़ा एक निजी कंपनी द्वारा इंगित किया गया है, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत को दिया गया हैं।

जस्टिस एके सीकरी व अशोक भूषण की पीठ ने आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह से कहा कि वह रावत से जानकारी प्राप्त करें कि क्या ऐसे दस्तावेज उन्हें दिए गए थे या सीधे अदालत में दिए गए थे।

बताते चले कि पूर्व में कमलनाथ तथा अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में मध्य प्रदेश में ६० लाख फर्जी मतदाता होने का दावा किया था।

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